
आदेश में समिति ने विभिन्न शासकीय परिपत्रों, अभिलेखों और न्यायालयीन निर्णयों का भी उल्लेख किया है। विशेष रूप से आदेश में वर्ष 1998 के मध्यप्रदेश शासन के परिपत्र तथा छत्तीसगढ़ शासन के वर्ष 2002 के परिपत्र का उल्लेख करते हुए उनके प्रभाव पर विचार किया गया है।समिति के आदेश का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि “उपरोक्त परिपत्रों दस्तावेजों/अभिलेखों, उपलब्ध साक्ष्यों व गुण-दोष के आधार पर जाति प्रमाण पत्र धारक नम्रता सिंह को छत्तीसगढ़ राज्य में गोंड, अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्र की पात्रता आती है।”यानी जिस जाति प्रमाण पत्र को लेकर लंबे समय से विवाद और सवाल खड़े किए जा रहे थे, उस पर उच्च स्तरीय छानबीन के बाद समिति ने उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर नम्रता सिंह की गोंड अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्र की पात्रता को स्वीकार किया है।
यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल किसी राजनीतिक बयान या सोशल मीडिया दावे पर आधारित नहीं, बल्कि शासकीय स्तर पर गठित उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति द्वारा की गई जांच के बाद जारी आधिकारिक आदेश है।
अब इस फैसले के बाद नम्रता सिंह के जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रही बहस को एक महत्वपूर्ण आधिकारिक आधार मिल गया है।
